ऐ गरीबी ! तेरा कोई हल तो होगा ही,
मुझे यकीन है
आज नहीं तो कल तो होगा ही ।
तू खून - ए - पसीना करता जा
परिवर्तन पल - पल तो होगा ही,
ऐ गरीबी ! तेरा कोई हल तो होगा ही ......
हिम द्रवित तो जल होगा ही
सरिता प्रवहित तो कल - कल होगा ही ।
ऐ परिंदे ! तू दीदार - ए - गगन करता जा,
मुझे है यकीन,
तू लक्ष्य भेदने में सफल तो होगा ही,
ऐ गरीबी ! तेरा कोई हल तो होगा ही ......
कच्ची ये ईंटे है और कच्ची ही दीवार है,
डरकर जो तू बैठ गया,
तेरे बृद्ध पिता की हार है ।
राह - ए - अंगार पर तू चलते जाना,
तेरा भी अपना एक महल तो होगा ही ।
ऐ गरीबी ! तेरा कोई हल तो होगा ही ......
© dECOdER
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