Monday, 26 October 2020

ऐ गरीबी ! तेरा कोई हल तो होगा ही.......

ऐ गरीबी ! तेरा कोई हल तो होगा ही,

मुझे यकीन है

आज नहीं तो कल तो होगा ही ।

तू खून - ए - पसीना करता जा

परिवर्तन पल - पल तो होगा ही,

ऐ गरीबी ! तेरा कोई हल तो होगा ही ......


हिम द्रवित तो जल होगा ही 

सरिता प्रवहित तो कल - कल होगा ही ।

ऐ परिंदे ! तू दीदार - ए - गगन करता जा,

मुझे है यकीन,

तू लक्ष्य भेदने में सफल तो होगा ही,

ऐ गरीबी ! तेरा कोई हल तो होगा ही ......


कच्ची ये ईंटे है और कच्ची ही दीवार है,

डरकर जो तू बैठ गया,

तेरे बृद्ध पिता की हार है । 

राह - ए - अंगार पर तू चलते जाना,

तेरा भी अपना एक महल तो होगा ही । 

ऐ गरीबी ! तेरा कोई हल तो होगा ही ......


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