प्रकृति का प्रकोप है जारी,
आहत है सभी ,पशु -पक्षी ,नर और नारी।
विडंबना है! हमारे देश की,
जहाँ राजनीति है सब पर भारी ॥
नेता जी कहते 'प्रकृति प्रकोप'
कौन पायेगा इसको रोक।
मै कहता हूँ 'मानवता' ,एकजुट हो जा,
वक्त नहीं करने का शोक॥
एक सलाम सेना के नाम,
किया है जिसने ऐसा काम ।
मार स्वयं को जिसने ,
दिया डाल मुर्दों में जान॥